जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे इंजीनियर राशिद, पिता की बीमारी का हवाला
इंजीनियर राशिद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बारामूला से सांसद अब दिल्ली हाईकोर्ट के दरवाजे खटखटा चुके हैं, जमानत की गुहार लगाते हुए। कारण? पिता की गंभीर बीमारी। लेकिन क्या यह आवेदन उनकी लंबी कानूनी लड़ाई में कोई राहत दिला पाएगा? आइए, इस मामले की गहराई में उतरें।
इंजीनियर राशिद कौन हैं? पृष्ठभूमि
इंजीनियर राशिद, जिनका पूरा नाम अब्दुल राशिद शेख है, जम्मू-कश्मीर के बारामूला से लोकसभा सांसद हैं। वे ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) से जुड़े रहे हैं और कश्मीर घाटी में अपनी मुखर राजनीति के लिए जाने जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अमित शाह को कड़ी टक्कर दी और जीत हासिल की। लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा पर अब एनआईए का आतंकी फंडिंग केस लगा हुआ है।
राशिद को 21 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत उन्हें हिरासत में लिया। आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से फंडिंग प्राप्त की और कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। विशेष अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे।
जमानत याचिका का आधार: पिता की बीमारी
इस बार राशिद ने अंतरिम जमानत (इंटरिम बेल) की मांग की है। उनका तर्क है कि उनके पिता की हालत नाजुक है। वे इलाज के लिए समय चाहते हैं। याचिका में कहा गया है कि पिता को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया है और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए राशिद को बाहर आने की जरूरत है।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर इस याचिका पर सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होनी है। ईडी ने पहले ही विरोध दर्ज कराया है, दावा करते हुए कि राशिद फ्लाइट का खतरा पैदा कर सकते हैं। क्या कोर्ट पिता की बीमारी को पर्याप्त आधार मानेगा? पिछले मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी, लेकिन स्थायी जमानत नहीं मिली।
कानूनी प्रक्रिया: पीएमएलए के तहत जमानत क्यों मुश्किल?
पीएमएलए के तहत जमानत मिलना आसान नहीं। धारा 45 के अनुसार, अदालत को संतुष्ट होना पड़ता है कि आरोपी दोबारा अपराध नहीं करेगा और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। राशिद का मामला संवेदनशील है क्योंकि इसमें आतंकी फंडिंग जुड़ी है। एनआईए और ईडी का दावा है कि 6 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग हुई, जो हिजबुल मुजाहिदीन को ट्रांसफर की गई।
राशिद ने दावा किया है कि फंडिंग चुनावी खर्च के लिए थी, न कि आतंकवाद के लिए। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल उन्हें चुनाव लड़ने की छूट दी, लेकिन हिरासत बरकरार रखी। अब हाईकोर्ट का फैसला तय करेगा कि क्या वे परिवार से मिल पाएंगे।
राजनीतिक कोण: कश्मीर में क्या संदेश?
यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है। राशिद कश्मीर में अलगाववादी विचारधारा के प्रतीक हैं। उनकी गिरफ्तारी पर घाटी में विरोध प्रदर्शन हुए थे। एनडीए सरकार पर आरोप लगे कि यह राजनीतिक साजिश है। वहीं, ईडी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ती है।
अगर जमानत मिली, तो यह विपक्ष के लिए राहत होगी। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद ऐसे मामलों पर नजर बनी रहती है। राशिद की लोकप्रियता युवाओं में बनी हुई है, जो सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में सक्रिय हैं।

पिछले फैसलों का विश्लेषण
| कोर्ट/तारीख | याचिका का प्रकार | फैसला | कारण |
|---|
| कोर्ट/तारीख | याचिका का प्रकार | फैसला | कारण |
|---|---|---|---|
| विशेष अदालत, 2024 | नियमित जमानत | खारिज | फ्लाइट रिस्क |
| सुप्रीम कोर्ट, 2024 | चुनाव लड़ने की अनुमति | मंजूर | लोकतांत्रिक अधिकार |
| सुप्रीम कोर्ट, 2025 | स्थायी जमानत | खारिज | पीएमएलए उल्लंघन |
| दिल्ली हाईकोर्ट, 2026 | अंतरिम जमानत | लंबित | पिता की बीमारी |
यह तालिका दिखाती है कि राशिद की कानूनी लड़ाई लंबी चल रही है। अंतरिम जमानत पर कोर्ट अक्सर मानवीय आधार पर फैसला लेता है, जैसे कोविड काल में कई मामलों में।
संभावित परिणाम और भविष्य
अगर हाईकोर्ट ने जमानत दी, तो राशिद संसद सत्र में हिस्सा ले सकेंगे। लेकिन ईडी अपील कर सकती है। अस्वीकार पर सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी उम्मीद बचेगी। कश्मीर में शांति प्रक्रिया के बीच यह केस राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस छेड़ सकता है।
क्या पिता की बीमारी जमानत का टर्निंग पॉइंट बनेगी? वेलोसिटी न्यूज लगातार अपडेट देता रहेगा। आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं।























