कानपुर कचहरी से 5वीं मंजिल से कूदे प्रियांशु: सुसाइड नोट में पिता पर लगाए गंभीर आरोप, ‘ऐसे पिता भगवान न दे’
कानपुर के जिला कचहरी परिसर में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक ने मरने से पहले दो पेज का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी आखिरी इच्छा जाहिर की- ‘यह नोट जो भी पढ़े, उसे अंत तक पढ़ना।’ यह नोट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें प्रियांशु ने अपने पिता राजेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रियांशु (उम्र 25 वर्ष) लंबे समय से परिवारिक कलह का शिकार थे। कचहरी स्टाफ के अनुसार, वह बार-बार ऊपरी मंजिल पर जाते थे और अचानक छलांग लगा ली। स्थानीय लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। यह घटना कानपुर की कचहरी में पहली नहीं है, लेकिन सुसाइड नोट की वजह से यह सुर्खियों में है।
सुसाइड नोट का चौंकाने वाला खुलासा: ‘पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक’
सुसाइड नोट में प्रियांशु ने पिता राजेंद्र कुमार की डांट-फटकार, उलाहने और निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “पिता की डांट जिंदगी भर सालती रही। ऐसे पिता भगवान किसी को न मिले। पिता उसका शव भी न छू पाएं। पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो।” नोट में परिवार के अन्य सदस्यों को भी संदेश दिए गए हैं, जो भावुक और आरोपों से भरे हैं।
यह नोट प्रियांशु के मोबाइल से बरामद हुआ। पुलिस ने इसे सबूत के तौर पर सुरक्षित कर लिया है। वायरल नोट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है- क्या यह पारिवारिक दबाव का नतीजा है या कुछ और?
पिता राजेंद्र कुमार पर भारी आरोप: डांट और धमकियों का दर्द
प्रियांशु के पिता राजेंद्र कुमार कानपुर के निवासी हैं। नोट के मुताबिक, राजेंद्र की सख्ती ने बेटे को तोड़ दिया। प्रियांशु ने लिखा कि पिता रिश्ते में इतनी दूरी पैदा कर चुके थे कि वह अब सहन नहीं कर पाए। परिवारिक स्रोतों के अनुसार, प्रियांशु लॉ की पढ़ाई पूरी कर प्रशिक्षु वकील बन चुके थे, लेकिन घरेलू कलह से परेशान थे।
पिता ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। पड़ोसियों का कहना है कि घर में अक्सर झगड़े होते थे। प्रियांशु की मां और भाई-बहन भी सदमे में हैं। पुलिस परिवार से पूछताछ कर रही है।
कानपुर कचहरी: वकीलों की दुनिया में बढ़ते मानसिक तनाव के संकेत
कानपुर जिला कचहरी उत्तर प्रदेश की प्रमुख अदालतों में शुमार है, जहां हजारों वकील और प्रशिक्षु काम करते हैं। यहां के युवा वकील अक्सर हाई प्रेशर जॉब, आर्थिक तंगी और परिवारिक दबाव से जूझते हैं। पिछले दो वर्षों में कचहरी परिसर में तीन ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में डिप्रेशन के केस 30% बढ़े हैं। प्रियांशु का मामला परिवारिक毒 की मिसाल है। वकील संघ ने शोक व्यक्त किया है और काउंसलिंग सेंटर खोलने की मांग की है।
कानूनी कोण: सुसाइड नोट से क्या साबित होता है?
भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत अगर सुसाइड नोट साबित हो गया, तो पिता पर मुकदमा दर्ज हो सकता है। पुलिस फॉरेंसिक जांच कर रही है। वकीलों का कहना है कि नोट भावनात्मक है, लेकिन आरोप गंभीर। कोर्ट में यह सबूत बनेगा।
पिछले मामलों में जैसे दिल्ली के वकील सुसाइड में परिवार पर केस चले। यहां भी यही हो सकता है।
समाज पर असर: परिवारिक毒 और युवा मानसिक स्वास्थ्य पर बहस
यह घटना भारत के परिवारिक ढांचे पर सवाल उठाती है। पिता की सख्ती अच्छी मंशा से हो सकती है, लेकिन सीमा लांघ जाए तो घातक। एनसीआरबी डेटा बताता है कि 2024 में 1.7 लाख सुसाइड में 25% परिवारिक कलह से जुड़े।
सोशल मीडिया पर #JusticeForPriyanshu ट्रेंड कर रहा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- खुलकर बात करें, हेल्पलाइन जैसे कि किरण (1800-599-0019) का सहारा लें। प्रियांशु की मौत व्यर्थ न जाए।
निष्कर्ष: सबक लेने का समय
प्रियांशु श्रीवास्तव की ट्रेजिक मौत कानपुर को हिला गई। सुसाइड नोट परिवारिक रिश्तों की नाजुकता दिखाता है। समाज को जागना होगा- डांट से ज्यादा प्यार दें। पुलिस जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आएगी। रेस्ट इन पीस, प्रियांशु।
स्रोत: स्थानीय पुलिस, वायरल सुसाइड नोट, परिवारिक स्रोत। वेलोसिटी न्यूज द्वारा रिपोर्ट।



























