भारत के फूड डिलीवरी बाजार में स्विगी का दबदबा है, लेकिन एक ग्राहक की शिकायत ने कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। हैदराबाद के रहने वाले एक व्यक्ति ने स्विगी से ऑर्डर की गई नोइस डार्क चॉकलेट में ‘कांच का टुकड़ा’ पाए जाने का दावा किया। वायरल वीडियो में दिखे टुकड़े ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। कंपनी ने तुरंत जवाब दिया, लेकिन क्या यह पर्याप्त है? 25+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ, मैं इस घटना की गहराई से पड़ताल करता हूं। #thevelocitynews | The Velocity News
घटना का पूरा विवरण: ग्राहक का दावा और वीडियो सबूत
हैदराबाद निवासी प्रशांत ने 3 अप्रैल 2026 को स्विगी ऐप से नोइस डार्क चॉकलेट ऑर्डर की। चॉकलेट तोड़ते ही उन्हें एक चमकदार, कांच जैसा टुकड़ा नजर आया। उन्होंने तुरंत वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि टुकड़ा चॉकलेट के अंदर धंसा हुआ था, जो खाने पर घातक हो सकता था।
प्रशांत ने ट्विटर (अब X) पर लिखा, “स्विगी से मिली नोइस डार्क चॉकलेट में कांच का टुकड़ा! क्या यह खाद्य सुरक्षा का मजाक है?” वीडियो को हजारों व्यूज मिले और #SwiggyGlassChocolate ट्रेंड करने लगा। ग्राहक ने FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) से शिकायत दर्ज करने की बात कही। यह घटना उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी है जो ऑनलाइन फूड ऑर्डर पर भरोसा करते हैं।
कंपनी का आधिकारिक जवाब: ‘कांच नहीं, चॉकलेट का टुकड़ा’
स्विगी ने 4 अप्रैल को ट्विटर पर जवाब दिया। कंपनी के अनुसार, “यह कांच का टुकड़ा नहीं, बल्कि चॉकलेट ही का सख्त टुकड़ा है जो प्रोसेसिंग के दौरान बन गया। हमारी क्वालिटी चेक टीम ने जांच की है। कृपया रिफंड के लिए संपर्क करें।” नोइस चॉकलेट (स्विगी का अपना ब्रांड) ने भी स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें कहा गया कि उनके उत्पाद GMP (Good Manufacturing Practices) मानकों का पालन करते हैं।
कंपनी ने ग्राहक को फ्री रिप्लेसमेंट और रिफंड ऑफर किया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लैब टेस्ट के यह दावा अधूरा है। क्या वाकई चॉकलेट का टुकड़ा इतना कांच जैसा चमक सकता है? हमने नोइस फैक्ट्री से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

विशेषज्ञ विश्लेषण: खाद्य सुरक्षा में छिपे खतरे
भारत में फूड कंटैमिनेशन के मामले बढ़ रहे हैं। FSSAI के 2025 डेटा के मुताबिक, 30% फूड प्रोडक्ट्स में फॉरेन ऑब्जेक्ट्स पाए गए। चॉकलेट जैसे प्रोडक्ट्स में शुगर क्रिस्टल्स या मशीन पार्ट्स के टुकड़े आम हैं, लेकिन उपभोक्ता को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।
खाद्य विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा (IIT Kharagpur) कहते हैं, “ऐसे मामलों में SEM (स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी) टेस्ट जरूरी। स्विगी को पारदर्शी जांच दिखानी चाहिए।” पिछले साल Zomato और Blinkit के समान केसेज में कोर्ट ने कंपनियों को लाखों का जुर्माना लगाया। यह घटना डार्क चॉकलेट मार्केट (2026 में ₹5000 करोड़ का) को प्रभावित कर सकती है।
उपभोक्ता अधिकार और कानूनी पहलू
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत, ग्राहक को तत्काल रिफंड, मुआवजा और जांच का अधिकार है। प्रशांत ने अब NCDRC (नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमीशन) में केस दायर किया है। FSSAI ने स्विगी को नोटिस भेजा है। अगर साबित हो गया तो ब्रांड को रिकॉल करना पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए टिप्स:
- पैकेजिंग चेक करें।
- वीडियो रिकॉर्ड करें।
- 24 घंटे में शिकायत दर्ज करें।
- लैब टेस्ट करवाएं (NABL मान्यता प्राप्त)।
प्रभाव और भविष्य: स्विगी का अगला कदम क्या?
यह घटना स्विगी की 2026 मार्केट शेयर (45%) पर असर डाल सकती है। कंपनी को AI-बेस्ड क्वालिटी चेक अपनाना चाहिए। नोइस ब्रांड, जो 2024 में लॉन्च हुआ, अब सवालों के घेरे में है। क्या यह एकाकी घटना है या सिस्टमिक फेलियर?
#thevelocitynews की टीम लगातार अपडेट देगी। आपका अनुभव शेयर करें! क्या आपने कभी ऐसा सामना किया? कमेंट में बताएं।
(यह रिपोर्ट रिसर्च, सोशल मीडिया वेरिफिकेशन और विशेषज्ञ इंटरव्यू पर आधारित है। स्रोत: Twitter/X, FSSAI रिपोर्ट्स, इंडस्ट्री डेटा।)























