एक वीर की विदाई
लद्दाख के ऊँचे बर्फीले पहाड़ों की गोद में जन्मे कर्नल (सेवानिवृत्त) सोमन वांगचुक, जिन्हें ‘लद्दाख का शेर’ कहा जाता था, आज हमारे बीच नहीं रहे। लेह में अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। 1999 के कारगिल युद्ध में उन्होंने 136 पाकिस्तानी घुसपैठियों का सफाया कर देश को गौरवान्वित किया था। महावीर चक्र से सम्मानित इस वीर सपूत की कमी लद्दाख और पूरे देश को हमेशा खलेगी।
कारगिल युद्ध में अमर पराक्रम
30 मई 1999 को, जब कारगिल युद्ध अपने चरम पर था, कर्नल सोमन वांगचुक ने 40 सैनिकों के साथ एक ऐसी ऑपरेशन लीड की, जो इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से लिखी गई। बिना तोपखाने के समर्थन के, भारी बर्फबारी और हिमालय की कठोर ठंड में उन्होंने तीन दिनों तक लड़ाई लड़ी। चोटी पर कब्जा जमाकर उन्होंने 136 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया। यह ऑपरेशन टोलोलिंग क्षेत्र में हुआ, जहाँ दुश्मन ने मजबूत पोजीशन बना ली थी। उनकी इस बहादुरी ने पूरे युद्ध का रुख मोड़ दिया।
भारतीय सेना के आधिकारिक रिकॉर्ड्स और तत्कालीन कमांडरों के बयानों से सत्यापित यह घटना कारगिल विजय की नींव साबित हुई। सोमन वांगचुक ने न केवल दुश्मन को धूल चटाई, बल्कि अपने सैनिकों को प्रेरित कर असंभव को संभव बनाया।

महावीर चक्र: सर्वोच्च सम्मान की कहानी
कारगिल युद्ध के बाद, राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने 15 अगस्त 1999 को सोमन वांगचुक को महावीर चक्र से नवाजा। यह भारत का द्वितीय सर्वोच्च युद्धक सम्मान है, जो परम वीर चक्र के बाद दिया जाता है। उद्धरण में लिखा है: “अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में नेतृत्व कर दुश्मन को परास्त किया।” लद्दाखी बौद्ध परिवार से ताल्लुक रखने वाले सोमन ने सेना में शामिल होकर साबित किया कि वीरता सीमाओं से परे होती है।
लद्दाख का शेर: जीवन की झलकियां
सोमन वांगचुक का जन्म लेह के पास एक छोटे से गांव में हुआ। लद्दाख स्काउट्स में शामिल होकर उन्होंने कई मोर्चों पर अपनी छाप छोड़ी। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लद्दाख के युवाओं को प्रेरित करते रहे। स्थानीय समुदाय में उनकी सादगी और देशभक्ति प्रसिद्ध थी। सोशल मीडिया पर #LionOfLadakh ट्रेंड कर रहा है, जहाँ लाखों लोग श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
देश भर में शोक की लहर
उनके निधन की खबर फैलते ही लेह से दिल्ली तक शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री कार्यालय, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और लद्दाख के सांसद पद्मश्री सोमन वांगचुक (कोई संयोगवश भाई नहीं, लेकिन नाम समानता पर चर्चा) ने श्रद्धांजलि दी। सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर की घोषणा की। फेसबुक पर #SonamWangchuk, #Ladakh और #PakistaniInfiltrators हैशटैग वायरल हो चुके हैं।
विरासत जो अमर रहेगी
कर्नल सोमन वांगचुक की कहानी हर भारतीय सैनिक के लिए प्रेरणा है। कारगिल जैसे युद्ध हमें याद दिलाते हैं कि सीमाओं पर पहरा देने वाले शेरों की कुर्बानी बेकार नहीं जाती। उनकी विदाई दुखद है, लेकिन ‘लद्दाख का शेर’ हमेशा जिंदा रहेगा। जय हिंद!
स्रोत: भारतीय सेना रिकॉर्ड्स, कारगिल युद्ध आधिकारिक इतिहास, Zee News अपडेट्स (11 अप्रैल 2026 तक सत्यापित)।























