राजस्थान के नागौर जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) का चालान थमाया गया। जी हां, ऐसा वाहन जिसका साइलेंसर ही नहीं होता, उसे धुएं के उत्सर्जन पर जुर्माना! यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और लोगों में पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
25 साल से अधिक अनुभव वाले पत्रकार के नजरिए से यह घटना न सिर्फ नियमों की अनदेखी दर्शाती है, बल्कि ईवी को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों पर भी सवाल खड़े करती है। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।
घटना का पूरा विवरण: क्या हुआ नागौर में?
नागौर जिले में एक पुलिसकर्मी ने आशोक पंवार के इलेक्ट्रिक वाहन को रोक लिया। पुलिस ने वाहन पर पीयूसी सर्टिफिकेट चेक किया और ₹1500 का चालान काट दिया। ऊपर से टिंटेड ग्लास (ब्लैक फिल्म) के लिए ₹200 का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया, कुल ₹1700 वसूल लिए गए।
आशोक पंवार ने इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वे साफ कहते नजर आ रहे हैं, “यह इलेक्ट्रिक वाहन है, इसमें साइलेंसर ही नहीं लगता। धुआं तो बिल्कुल नहीं निकलता, फिर पीयूसी क्यों?” उन्होंने टिंटेड ग्लास के आरोप को भी खारिज किया। उनका कहना है कि खिड़कियों पर सूरज की रोशनी से बचाव के लिए मेश लगाया गया था, न कि कोई ब्लैक फिल्म।
यह वीडियो #TheVelocityNews और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शेयर हो रहा है, जिससे हजारों लोग इसे देख चुके हैं। नागौर पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
नियम क्या कहते हैं? ईवी पर पीयूसी जरूरी या नहीं?
केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और इसके नियमों के तहत पीयूसी प्रमाण पत्र वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बात करें तो स्थिति अलग है। ईवी बैटरी से चलते हैं, पेट्रोल-डीजल इंजन नहीं होते, इसलिए इनमें एग्जॉस्ट या साइलेंसर जैसी कोई व्यवस्था नहीं।
- केंद्रीय मोटर वाहन नियम 120: यह धुएं के उत्सर्जन पर फोकस करता है। ईवी में शून्य उत्सर्जन होने से पीयूसी की जरूरत नहीं।
- 2021 का संशोधन: भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि बैटरी चालित वाहनों को पीयूसी से छूट है। आरटीओ दिशानिर्देशों में भी ईवी को अलग श्रेणी में रखा गया है।
- राजस्थान परिवहन विभाग: राज्य स्तर पर भी ईवी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जैसे सब्सिडी और चार्जिंग स्टेशन। पीयूसी चालान ईवी पर लागू नहीं होना चाहिए।
फिर भी, कुछ पुलिसकर्मी जागरूकता की कमी या पुराने नियमों के भरोसे ऐसी गलतियां कर बैठते हैं। आशोक पंवार का दावा सही लगता है—यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
टिंटेड ग्लास चालान: मेश को ब्लैक फिल्म क्यों माना?
मोटर वाहन नियम 100 के तहत वाहन की खिड़कियों पर टिंटेड फिल्म प्रतिबंधित है, खासकर आगे की साइड विंडो पर 70% से अधिक पारदर्शिता जरूरी। लेकिन आशोक का कहना है कि लगा मेश सूरज से सुरक्षा के लिए था, न कि टिंट।
वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि पुलिस ने बिना विस्तृत जांच के चालान थमा दिया। अगर मेश सुरक्षा उद्देश्य का है, तो यह वैध हो सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के 2012 के आदेश के बाद टिंट सख्ती से लागू है।
सोशल मीडिया पर हंगामा: जनता की प्रतिक्रियाएं
वीडियो वायरल होते ही ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने पुलिस की तारीफ की, कहते हुए “कानून सबके लिए बराबर”। लेकिन ज्यादातर ने पुलिस की आलोचना की:
- “ईवी को बढ़ावा देना चाहिए, चालान क्यों?”
- “पुलिस को ट्रेनिंग की जरूरत, ईवी नियम पता नहीं।”
- “₹1700 लूट, वीडियो वायरल होने पर लौटाएंगे?”
हैशटैग #EVPUCChallan और #NagaurPolice ट्रेंड कर रहे हैं। कई ने आरटीओ और मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग किया है।

व्यापक प्रभाव: ईवी अपनाने पर असर?
भारत में ईवी क्रांति चल रही है। 2026 तक 30% वाहन ईवी होने का लक्ष्य है। FAME-II योजना से सब्सिडी मिल रही है। लेकिन ऐसी घटनाएं ड्राइवरों का मन भा सकती हैं।
- सकारात्मक पक्ष: नागौर जैसी घटनाएं जागरूकता बढ़ाती हैं।
- नकारात्मक: छोटे शहरों में पुलिस-आरटीओ ट्रेनिंग की कमी।
- समाधान: डिजिटल PUC मशीनों में ईवी ऑप्शन जोड़ना और पुलिस वर्कशॉप।
पिछले साल राजस्थान में 5000+ ईवी रजिस्टर हुए, लेकिन चालान विवाद बढ़े हैं।
आगे क्या? आशोक पंवार को न्याय मिलेगा?
आशोक ने कहा, “मैं चालान रद्द कराने आरटीओ जाऊंगा।” नागौर एसपी से संपर्क करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं। अगर वीडियो साक्ष्य मजबूत है, तो चालान रद्द हो सकता है।
सरकार को चाहिए:
- पुलिस के लिए ईवी ट्रेनिंग अनिवार्य करें।
- PUC ऐप में ईवी छूट स्पष्ट करें।
- शिकायत पोर्टल बनाएं।
यह घटना समाज के लिए सबक है—नियमों की सही जानकारी ही भ्रम दूर करेगी।
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