फिजिकल हेल्थ: ठंड में ज्यादा नींद क्यों आती है? डॉक्टर से समझें मेलाटोनिन का साइंस और विंटर स्लीप गाइड
सर्द हवाओं के साथ जब सुबह की धूप देर से निकलती है, तो बिस्तर की गर्माहट छोड़ना लगभग नामुमकिन लगता है। बहुतों के साथ ऐसा होता है कि ठंड के मौसम में नींद बहुत लंबी और उठना मुश्किल लगता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या सर्दी हमारे शरीर के भीतर कुछ बदल देती है? The Velocity News ने इस सवाल का जवाब खोजने के लिए नींद विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्ट से विस्तार से बात की।
मेलाटोनिन क्या है? नींद का असली “डायरेक्टर”
मेलाटोनिन एक प्राकृतिक स्लीप हॉर्मोन है, जिसे मस्तिष्क के पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) से स्रावित किया जाता है। यह हॉर्मोन हमारे शरीर की सर्केडियन रिद्म यानी जैविक घड़ी को नियंत्रित करता है।
जब सूरज ढलता है और अंधेरा बढ़ता है, तो मेलाटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे नींद आने लगती है। इसलिए सर्दियों में जब दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं, तो मेलाटोनिन का उत्पादन स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
ठंड और मेलाटोनिन का रिश्ता: साइंस के नजरिए से
विंटर स्लीप साइंस के अनुसार, ठंडे तापमान और कम धूप, दोनों मिलकर शरीर की घड़ी को “स्लीप मोड” में रख देते हैं।
- ठंड में सूर्य का प्रकाश कम मिलता है, जिससे सेरोटोनिन घटता और मेलाटोनिन बढ़ता है।
- परिणामस्वरूप व्यक्ति ज्यादा उनींदा, सुस्त और धीमा महसूस करता है।
- स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट बताती है कि दिसंबर और जनवरी के दौरान औसतन नींद की अवधि 20-30 मिनट बढ़ जाती है।
अर्थात, यह सिर्फ “आलस्य” नहीं बल्कि शरीर की जैविक ज़रूरत है।
मौसम का असर दिमाग पर: सेरोटोनिन और मूड की कहानी
नींद के साथ मूड का गहरा तालमेल है। जब सर्दी में दिन छोटा होता है, तो सेरोटोनिन (मूड बूस्टर हॉर्मोन) घटता है।
इससे कई लोगों को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) यानी “विंटर डिप्रेशन” महसूस होता है।
डॉक्टर बताते हैं कि इस दौरान पर्याप्त नींद और सुबह की धूप दोनों बेहद जरूरी होते हैं, ताकि दिमाग संतुलित रहे और ऊर्जा बनी रहे।
क्यों ठंड में जल्दी सोने और देर तक सोने की आदत पड़ती है
विंटर स्लीप साइंस में यह पाया गया कि ठंडे नस्लों (cold-climate populations) में औसत नींद का समय प्रति दिन 7.5 से बढ़कर 8.5 घंटे तक चला जाता है।
इसका कारण यह है:
- शरीर का तापमान कम होना: ठंडक मेलाटोनिन रिलीज़ को ट्रिगर करती है।
- लंबा अंधेरा: सूरज देर से निकलने के कारण नींद लंबी होती है।
- कम एक्टिविटी: लोग बाहर कम निकलते हैं, जिससे शारीरिक थकान की जगह नींद की बढ़त होती है।
इसलिए, जो लोग सोचते हैं कि वे बहुत “लेज़ी” हो गए हैं, उन्हें जानना चाहिए कि उनका शरीर केवल मौसम के अनुसार काम कर रहा है।
डॉक्टरों की सलाह: विंटर स्लीप में संतुलन कैसे रखें
बहुत ज्यादा नींद भी बॉडी क्लॉक को बिगाड़ सकती है। विशेषज्ञ निम्न उपाय सुझाते हैं:
- सुबह सूरज की रोशनी लें: इससे मेलाटोनिन स्तर नियंत्रित रहता है।
- रात में स्क्रीन टाइम घटाएं: मोबाइल की नीली रोशनी हॉर्मोनल रिद्म को प्रभावित करती है।
- हल्का व्यायाम करें: ठंड में 15 मिनट वॉक या योग शरीर की घड़ी को संतुलित करता है।
- स्लीप रूटीन तय करें: रोज़ एक ही समय पर सोना और उठना नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है।
- गर्म पेय जैसे हल्दी वाला दूध या अदरक चाय लें: ये शरीर को आराम देते हैं और नींद आसान बनाते हैं।
शोध और वास्तविक अनुभव
2024 के Sleep Foundation सर्वे के अनुसार, दुनिया भर के 48% लोगों को सर्दियों में “डीप स्लीप” अधिक मिलती है, जबकि 32% लोग खुद को “दिन में भी नींद भरा” महसूस करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों के कमरे में प्राकृतिक रोशनी ज़्यादा आती थी, उन्हें देर तक सोने की समस्या कम रही।
The Velocity News से बातचीत में मुंबई की स्लीप स्पेशलिस्ट डॉ. मनीषा धवन कहती हैं,
“जब हम समझ लेते हैं कि नींद सिर्फ थकान नहीं, बल्कि बॉडी का रेस्टोरेशन प्रोसेस है, तो मौसम का प्रभाव हमें परेशान नहीं करता।”
विंटर स्लीप गाइड: ठंड में नींद को अपने पक्ष में कैसे करें
- सुबह-सुबह पर्दे खोलें और नैचरल लाइट अंदर लाएं।
- कैफीन की मात्रा घटाएं, खासकर शाम के बाद।
- बेडरूम का तापमान 18–20°C के बीच रखें।
- सर्दी में ज्यादा गर्म कपड़े पहनकर सोने से बचें—हल्का और सांस लेने योग्य फैब्रिक बेहतर रहेगा।
- मेलाटोनिन-बढ़ाने वाले फूड जैसे चेरी, केला, और ओटमील का सेवन करें।

निष्कर्ष: नींद को समझना, मौसम को अपनाना
सर्दी आराम का मौसम है। इसलिए इस समय अपनी नींद को “गिल्ट” नहीं समझना चाहिए। बल्कि, यह शरीर का स्वाभाविक अनुरोध है — कि वह खुद को रिस्टोर करे, दिमाग को शांत करे और भावनाओं को संतुलित रखे।
ठंड में ज्यादा नींद आना कमजोरी नहीं, बल्कि प्रकृति की एक खूबसूरत रणनीति है — ताकि आप अगले मौसम में फिर से ऊर्जा से भर जाएं।
अच्छी नींद लें, सुकून से जिएं।
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