माँ चंद्रघंटा: दिव्य आराधना का अद्वितीय स्वरूप
नवरात्र के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों में तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व है। यह स्वरूप वीरता, शांति, और दिव्य शक्ति का प्रतीक है। माँ चंद्रघंटा का मंदिर, पूजा, कथा और महत्व प्राचीन शास्त्रों में वर्णित है। इनकी उपासना से जीवन में सभी प्रकार के भय, शत्रुता और नकारात्मकता का नाश हो जाता है।
माँ का यह स्वरूप विशेष रूप से उन साधकों और भक्तों के लिए कल्याणकारी माना जाता है जो अपने जीवन में साहस, आत्मविश्वास, शांति और सफलता की तलाश करते हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे माँ चंद्रघंटा की कथा, स्वरूप, महत्व, उपासना-विधि, पौराणिक प्रसंग और आध्यात्मिक पक्ष।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप
माँ चंद्रघंटा को त्रिनेत्रधारी देवी माना जाता है। इनके माथे पर अर्धचंद्र के आभूषण के रूप में घंटा सुसज्जित है, जिसके कारण इन्हें “चंद्रघंटा” नाम से जाना जाता है।
- माँ का वाहन शेर है, जो निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक है।
- इनकी दस भुजाएँ हैं।
- प्रत्येक हाथ में अलग-अलग अस्त्र और वर-मुद्रा धारण है।
- इनके शरीर से दिव्य स्वर्ण आभा प्रकट होती है।
इनके स्वरूप का दर्शन भक्तों को साहस, निर्भयता और आत्मविश्वास प्रदान करता है। घंटा-नाद से नकारात्मक शक्तियाँ पलायन कर जाती हैं।
पौराणिक कथा: माँ चंद्रघंटा की उत्पत्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ पार्वती जब भगवान शिव के साथ विवाह हेतु सज्जित हुईं, तब उन्होंने चंद्रमा को अलंकरण स्वरूप अपने माथे पर धारण किया। विवाह के पश्चात देवी का यह रूप उग्र और वीरता से परिपूर्ण माना गया।
दूसरे प्रसंग में जब राक्षस महिषासुर ने पृथ्वी, देवलोक और ब्रह्मांड में आतंक मचाना प्रारंभ किया, तब देवताओं ने माँ दुर्गा से प्रार्थना की। असुरों का वध करने हेतु माँ ने स्वरूप धारण किया और उनके माथे पर घंटे के समान अर्धचंद्र प्रकट हुआ। जब देवी ने अपने शेर पर चढ़कर युद्धभूमि में प्रवेश किया तो उनकी घण्टानाद से दुष्टात्माओं में भय व्याप्त हो गया। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा गया।
माँ चंद्रघंटा की उपासना विधि
माँ चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तृतीय दिन की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, सच्चे मन और श्रद्धा से की गई उपासना से जीवन में शांति की स्थापना होती है।
विधि:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- माँ चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए धूप, दीप, पुष्प और फल चढ़ाएँ।
- चंदन, गुलाब और कमल के पुष्प अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।
- लाल रंग के भोग जैसे हलवा, खीर, सेब, अनार आदि चढ़ाएँ।
- “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः” मंत्र का जप करें।
- आरती कर के प्रसाद ग्रहण करें।
माँ चंद्रघंटा का महत्व
माँ चंद्रघंटा की आराधना से:
- मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- भय और रोग का नाश होता है।
- आत्मविश्वास और साहस का विकास होता है।
- वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है।
यहाँ तक कि साधक अगर माँ चंद्रघंटा की उपासना नियमित रूप से करें, तो ध्यान साधना में अद्भुत सफलताएँ प्राप्त होती हैं।
माँ चंद्रघंटा और आध्यात्मिक अर्थ
घंटा का नाद केवल ध्वनि नहीं बल्कि ऊर्जा का प्रतीक है। माँ के स्वरूप का संदेश यही है कि मनुष्य को अपने जीवन से अंधकार, अवसाद और भय को समाप्त करना होगा। इसका स्थान लेना चाहिए ज्ञान, साहस और सत्य ने।
माँ चंद्रघंटा का तेज इस बात का संकेत है कि जीवन में आलस्य और अज्ञानता रूपी अंधकार का नाश कर केवल दिव्य प्रकाश की ओर बढ़ना ही मानव का ध्येय है।
चंद्रघंटा पूजा से जुड़े मंत्र
- बीज मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”
- ध्यान मंत्र: “पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता।।”
- स्तोत्र पाठ: माँ दुर्गा के कवच और अर्गला स्तोत्र का पाठ अत्यंत कल्याणकारी है।
माँ चंद्रघंटा और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में माँ चंद्रघंटा की उपासना ग्रह-बाधाओं से मुक्ति में सहायक मानी जाती है।
- यह विशेष रूप से चंद्र दोष और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए कारगर है।
- विवाह में विलंब, पारिवारिक कलह, और करियर में अड़चन जैसी बाधाओं पर इनकी कृपा शुभ फल देती है।
माँ चंद्रघंटा से जुड़ी कथाएँ और प्रसंग
पुराणों में माँ चंद्रघंटा की कई कथाएँ मिलती हैं जिनमें सबसे प्रमुख है असुरों के आतंक का अंत। जब उनका घण्टानाद हुआ तो समस्त दुष्टात्माएँ भयभीत होकर भाग खड़ी हुईं। आज भी मान्यता है कि यदि किसी के जीवन में नकारात्मक ऊर्जा हावी है, तो माँ चंद्रघंटा की आराधना मात्र से उसका नाश अवश्य होता है।
आधुनिक संदर्भ में पूजा का महत्व
आज के समय में जब मनुष्य भय, तनाव, और असुरक्षा से घिरा हुआ है, माँ चंद्रघंटा की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
- यह साधना आत्मबल को मजबूत करती है।
- व्यावसायिक जीवन में आ रही चुनौतियाँ कम होती हैं।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ती है।
- आम जनजीवन में शांति और समृद्धि का संचार होता है।
निष्कर्ष
माँ चंद्रघंटा शक्ति, सौंदर्य और शांति का अद्भुत मेल हैं। इनकी आराधना भक्तों को केवल सांसारिक सुख ही नहीं बल्कि आत्मिक संतोष और साहस भी प्रदान करती है। नवरात्रि के तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा करना हर भक्त के लिए कल्याणकारी और मंगलदायक है।




