कल्पना करो। सुबह 9 बजे ऑफिस पहुंचते हो। बॉस चिल्लाता है। “ओवरटाइम करो, पैसे दूंगा!” लेकिन महीने भर बाद वेतन आता है। अधूरा। दिल टूटता है। यह कहानी लाखों नौकरीपेशा लोगों की है। Employee rights in India जानना जरूरी है। क्योंकि 2025 के नए श्रम संहिताओं ने नियम बदले हैं।
फिर भी, कई लोग अनजान रहते हैं। इसलिए शोषण होता है। उदाहरण लो। एक युवा लड़की मुंबई में काम करती थी। बॉस ने छुट्टी रोकी। वह बीमार पड़ी। लेकिन अधिकार पता न होने से चुप रही। Employee rights in India समझो तो ऐसा नहीं होता।
बॉस की मनमानी क्यों सहें?
नए कानून मजबूत हैं। न्यूनतम वेतन सभी को मिलेगा। केंद्र सरकार फ्लोर तय करेगी। राज्य नीचे नहीं रख सकेंगे। इसलिए, कम सैलरी अब अपराध है।
इसके अलावा, बेसिक सैलरी कुल पैकेज का 50% होनी चाहिए। पहले अलाउंस से बचते थे नियोक्ता। अब नहीं। Employee rights in India में यह बड़ा बदलाव है। उदाहरणस्वरूप, 10 लाख पैकेज पर 5 लाख बेसिक जरूरी।
मगर, उल्लंघन के आंकड़े चिंताजनक हैं। 40 करोड़ कामगार प्रभावित। कई को समय पर वेतन नहीं मिलता।
छुट्टी का हक़ भूलो मत
हर 20 दिन में एक कमाई छुट्टी। 240 दिन काम पर 12 दिन सालाना अवकाश। कैजुअल और सिक लीव भी। Employee rights in India में यह बुनियादी है।
महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश। 26 सप्ताह तक। निजी क्षेत्र में भी। इसलिए, गर्भवती होने पर डरो मत। कानून साथ है।
हालांकि, कई कंपनियां रोकती हैं। लेकिन श्रम आयुक्त से शिकायत करो। उदाहरण के तौर पर, एक दिल्ली कर्मचारी ने ऐसा किया। छुट्टी मिली।

ओवरटाइम और सुरक्षा के नियम
हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा नहीं। ओवरटाइम पर दोगुना पे। नए कोड में 8-12 घंटे शिफ्ट संभव। लेकिन सहमति से।
कार्यस्थल सुरक्षित हो। मेडिकल चेकअप जरूरी। महिलाओं को नाइट शिफ्ट पर सुरक्षा। Employee rights in India यौन उत्पीड़न से बचाते हैं। POSH एक्ट के तहत समिति बने।
इसके अतिरिक्त, ग्रेच्युटी अब 1 साल बाद। पहले 5 साल लगते थे। बड़ा लाभ।
गलत छंटनी से कैसे बचें?
नोटिस पीरियड दें। बिना कारण निकालना गैरकानूनी। 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनी बिना अनुमति छंटनी कर सकती। लेकिन नियम मानें।
ट्रेड यूनियन मजबूत बने। हड़ताल से पहले नोटिस। Employee rights in India सामूहिक सौदेबाजी सुनिश्चित करते हैं।
उदाहरण लो। 2025 में एक फैक्ट्री केस। कर्मचारियों ने अधिकार जताए। नौकरी बची। दर्द कम हुआ।
भेदभाव खत्म करो
समान काम, समान वेतन। लिंग आधारित फर्क नहीं। संविधान अनुच्छेद 14-16 रक्षा करते हैं।
गिग वर्कर्स को भी PF, पेंशन। ओला-उबर ड्राइवर अब कर्मचारी माने जा सकते।
इसलिए, आवाज उठाओ। चुप्पी शोषण बढ़ाती है।
दर्दभरी कहानियां जो बदलाव लाईं
अहमदाबाद की रीता 5 साल से क्लर्क। बॉस ने वेतन रोका। वह रोई। लेकिन employee rights in India सीखा। श्रम कोर्ट गई। 2 लाख मिले। अब खुश है।
इसके विपरीत, कई अनजान रहते। 2025 कोड से 40 करोड़ को फायदा। लेकिन जागरूकता जरूरी। द वेलोसिटी न्यूज जैसी रिपोर्टिंग मदद करती।
आगे क्या? जागो नौकरीपेशा!
Employee rights in India जानकर जीवन बदलो। कानून तुम्हारे पक्ष में। श्रम मंत्रालय ऐप डाउनलोड करो। शिकायत दर्ज करो।
अंत में, सोचो। क्या तुम्हारा हक़ छिन रहा? आवाज उठाओ। साझा करो। कमेंट में अपनी कहानी बताओ। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें।




